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वज्रासन कैसे करते हैं और इसके फायदे क्या हैं?

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वज्रासन क्या है और इसे कैसे करते हैं? "वज्रासन" दो शब्दों से मिलकर बना है। वज्र और आसन वज्र अर्थात कठोर एवं सख्त और आसन का अर्थ तो आप लोग जानते ही होंगे। मगर योग में यह आसन वज्रासन इसलिए कहलाता है, क्योंकि यह वज्रनाड़ी पर प्रभाव या दबाव बनाता है। यह नाड़ी गुदा और अंडकोष के बीच में स्थित होती है। वज्रासन करने की विधि:- समतल जमीन पर चढ़ाई या दरी बिछा ले। उसके बाद अपने दोनों जंगघाओ को वज्र अर्थात सख्त करके टांगों को मोड़े और दोनों तलवों को नितंबों के नीचे लगाकर बैठ जाएं। इस तरह से पैरों से लेकर घुटनों तक का भाग जमीन से सटा रहेगा। इसका ध्यान अवश्य रखें कि नितंब पैर के तलुवो पर और जांघे पिंडलियों पर रखें। अपने सिर और रीड़ की हड्डी में सीधा खिंचाव रखें। दोनों हाथ की कोहनी यों को बिना मोड़े और अपने हथेलियों को भूमि की ओर करके, फिर दोनों हथेलियों को अपने घुटनों पर रखें।दृष्टि सामने की ओर टिकाए रखें। [caption id="attachment_909" align="aligncenter" width="503"] Image Source - Google | Image By - allayurvedic</a [/caption] याद रहे आसन को नियमित रूप से रो...